नई दिल्ली, दिसम्बर 9 -- नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता नागरिक उड्डयन मंत्रालय के यात्री चार्टर के मुताबिक, अगर कोई विमानन कंपनी प्रस्थान से कम से कम दो हफ्ते पहले यात्री को उसकी उड़ान रद्द होने की सूचना देने में विफल रहती है, तो मुआवजा देना कानूनी रूप से अनिवार्य है और इसकी राशि उड़ान की अवधि पर निर्भर करती है। चार्टर के अनुसार, विमानन कंपनी को खुद बखुद मुआवजा देने की पहल करनी होती है, न कि यात्री के इसकी मांग करने का इंतजार करना होता है। अगर किसी यात्री की उड़ान रद्द हो जाए, तो भारतीय विमानन नियमों के तहत यात्रियों के कुछ अधिकार निर्धारित हैं। यदि एयरलाइन ने उड़ान रद्द कर दी है, तो यात्री को बिना किसी कटौती के पूरा रिफंड पाने का अधिकार है। यह पैसा बैंक खाते या क्रेडिट कार्ड में वापस करना होगा, रिफंड 7 कार्यदिवस के भीतर करना होगा। इसके अलावा...
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