सहरसा, फरवरी 22 -- सहरसा, नगर संवाददाता। शहर के पालिटेक्निक निवासी मनीष के झा की लिखी पुस्तक नदी और पर्वत: बेचैन जड़ों की यात्रा एक साधारण व्यक्ति के वास्तविक जीवन के अनुभवों पर आधारित एक गहन व्यक्तिगत और चिंतनशील आत्मकथात्मक उपन्यास है। जिसने असाधारण चुनौतियों का सामना किया है। यह बिहार में कोसी नदी के बाढ़ के मैदानों में एक साधारण बचपन से लेकर उपेक्षित शिक्षा प्रणाली में संघर्ष, महत्वाकांक्षी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी, असफलताओं और अंततः एक सामाजिक कार्यकर्ता और व्यवस्थित शिक्षा नेता के रूप में उनके परिवर्तन तक की उनकी यात्रा का वर्णन करती है।मनीष का जन्म कोसी नदी के बाढ़ग्रस्त मैदानों में हुआ है।जहां नदी की अनिश्चितता ने उन्हें कठिनाइयों और सहनशीलता दोनों का सामना करने की शक्ति दी।जर्जर स्कूलों, धूल भरे क्रिकेट मैदानों और बाढ़ से अक्...
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