बाराबंकी, मार्च 6 -- बाराबंकी। मिलावटी रंग-गुलाल की खपत सबसे अधिक ग्रामीण बाजारों में है। कारोबारियों की मानें तो गांव-देहात के बाजारों में मिलावटी सामान को खपाने में किसी तरह की परेशानी नहीं होती है। वजह, यहां कम पढ़े-लिखे और भोले भाले लोग आते है। दाम कम रहने के कारण आसानी से खरीद लेते हैं। बंद कमरे में मिलावट का खेल बाराबंकी। रंग-गुलाल में मिलावट का खेल बंद कमरे में किया जा रहा है। वैसे तो शहर में रंग-गुलाल की खेप यूपी के हाथरस, लखीसराय और पटना की मंडियों से आती है। लेकिन, मुनाफा के चक्कर में असली रंग-गुलाल में मिलावट कर दिया जाता है। शहर के कई मोहल्ले हैं, जहां असली-नकली का खेल खूब हो रहा है। नाम न छापने के शर्त पर एक कारोबारी ने बताया कि एक किलो असली रंग में केमिकल के साथ रेत (बालू) और नमक मिलाकर दस किलो मिलावटी रंग तैयार किया जाता है।...
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