संतकबीरनगर, फरवरी 11 -- संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले के संठी गांव के किसानों में चकबंदी को लेकर काफी आक्रोश है। किसान प्रभुनाथ की मौत के बाद लेखपाल व एसीओ के निलब्न के बाद भी आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। किसानों का आरोप है कि पिछले दो वर्षों से हो रही चकबंदी को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया गया। चक आवंटन, हिस्सेदारी तय कराने, नाम दर्ज कराने और आपत्तियों के निस्तारण के नाम पर लेखपाल से लेकर जिला स्तर तक खुलेआम धन उगाही होती रही। जो किसान पैसे देने में सक्षम रहे, उनके काम आसानी से हो गए, जबकि गरीब और ईमानदार किसानों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े। ग्रामीणों का आरोप है कि कई मामलों में एक पक्ष से पैसा लेने के बाद दूसरे पक्ष से अधिक रकम लेकर चक आवंटन जान बूझ कर इधर-उधर कर दिया गया। तरमीन (मूल्यांकन) और मालियत (उपज क्षमता)...
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