कोडरमा, अगस्त 6 -- चंदवारा निज प्रतिनिधि झारखंड में पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के दो दशक बाद भी ग्राम पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों, खासकर मुखियों की स्थिति असमंजस भरी बनी हुई है। पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त बनाने के उद्देश्य से गांवस्तर पर निर्वाचित मुखिया को कानूनी अधिकार तो मिले हैं, लेकिन प्रशासनिक और वित्तीय स्वतंत्रता अब भी अधूरी है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि पंचायत राज व्यवस्था के अन्तर्गत 29 विषयों के तहत मात्र तीन विषय 15वें वित, मनरेगा व स्वच्छता विभाग के हीं मामले देखने का अधिकार दिया गया है, वह भी सीमित अधिकार क्षेत्र में जबकि अन्य विभाग के अधिकारों से वंचित रखा गया है। उनका कहना है कि मुखियों के सीमित अधिकार व फंड के बिना पंचायत का समुचित विकास संभव नहीं है। ऐसे में सरकार द्वारा कराये गये चुनाव का कोई सार्थक ...
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