कन्नौज, मार्च 20 -- कन्नौज, संवाददाता। गौरैया घर आंगन से कहीं दूर चली गई है। घर के रौशनदान में उसका एक घोसला हुआ करता था। जहां से वह चहचहा कर हमें जगाती थी। ऐसा भी होता था रौशनदान से उड़ने की जुगत में उसके बच्चे हमारे बिस्तर पर गिर जाते थे। शहरों के बिना आंगन वाले फ्लैट गौरैया को नहीं भाते। एसी कमरों के बंद शीशे की खिड़कियों ने उसे दूर कर दिया है। हमारे बीच रहने -चहकने वाली यह चिड़िया और भी कारणों से दूर चली गई है। इस दिन लोग संरक्षण व विलुप्त होती गौरैया को बचाने के लिए कदम उठाते हैं। अब तो गौरैया शायद ही कहीं दिख जाए। अब किताबों में गौरैया को दिखाकर लोग बच्चों को इसकी कहानी सुनाते हैं। हमारे समाज में पशु पक्षियों का भी अपना महत्व माना जाता है। जिस घर में पशु और गौरैया पछी की बसेरा होता था उसे सौभाग्यशाली माना जाता था। लोग गौरैया के लिए पान...
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