हल्द्वानी, दिसम्बर 6 -- हल्द्वानी, वरिष्ठ संवाददाता। डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय के सभागार में शनिवार को बाल रोग विभाग, राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओर से 'नवजात पुनर्जीवन' विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य प्रो. जीएस. तितियाल, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरुण जोशी, बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. ऋतु रखोलिया एवं डॉ. प्रमोद कुमार ने दीप प्रज्वलन कर किया। प्रो. रखोलिया ने बताया कि भारत सरकार ने 2030 तक नवजात मृत्यु दर को एक अंक में लाने का लक्ष्य रखा है। देश में 25-30 प्रतिशत नवजातों की मौत जन्म के समय सांस न ले पाने (प्रसवकालीन श्वास अवरोध) के कारण होती है। जन्म के पहले मिनट को 'गोल्डन मिनट' कहा जाता है। यदि इस दौरान बच्चा सांस नहीं लेता तो मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी से स्थायी क्षति या मृत्यु हो सकती है। कार्यशाला में...