प्रयागराज, दिसम्बर 22 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एवं असामाजिक क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (गैंगस्टर एक्ट) के तहत जांच और अभियोजन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनिंदा तरीके से की जाने वाली जांच और चुनिंदा अभियोजन कानून के शासन के विपरीत है और इससे शासन व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर होता है। कोर्ट ने कहा कि प्रभावशाली और संगठित अपराध से जुड़े लोग जमानत की शर्तों का खुलेआम उल्लंघन करते हैं और अदालतों में बार-बार स्थगन लिया जाता है, जबकि अभियोजन तंत्र उन्हें प्रभावी ढंग से चुनौती देने में विफल रहता है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने ये टिप्पणियां गाजियाबाद के नंदग्राम थाने में राजेंद्र त्यागी वो दो अन्य के खिलाफ दर्ज गैंगस्टर एक्ट की प्राथमिकी रद्द करने मांग में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कीं। याची का कहन...
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