अहमदाबाद, जनवरी 15 -- गुजरात हाई कोर्ट ने 2018 के गैंगरेप-हत्या मामले में मौत की सजा पाए तीन लोगों को बरी कर दिया है। कोर्ट का मानना ​​है कि अभियोजन पक्ष मामले को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। अप्रैल 2022 में सेशन कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। जस्टिस इलेश वोरा और आर टी वच्छानी की खंडपीठ ने कहा कि डीएनए प्रोफाइलिंग रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि नमूने फोरेंसिक प्रयोगशाला में भेजने में 14 दिन की देरी हुई थी। तीन लोगों गोपी देवीपुजक, लाला वादी और जयंती वादी को एक महिला के कथित गैंगरेप और हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। महिला का शव 29 अक्टूबर 2018 को खेड़ा जिले के एक गांव में मिला था। अप्रैल 2022 में सेशन कोर्ट ने विभिन्न साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और डीएनए रिपोर्ट पर विचार करने के बाद तीनो...