औरंगाबाद, अप्रैल 19 -- हार्वेस्टर से गेंहू की कटनी व दवनी के बाद किसान खेत में ही डंठल जला रहे हैं। इससे भूमि बंजर हो सकती है। कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ अनूप चौबे ने कहा कि खेत में आग लगाने से मित्र कीट मर जाते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति क्षय होती है। खेत में एक बार अवशेष जलाने से कम से कम एक सीजन के लिए मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। बार-बार यह क्रिया दुहराने से मिट्टी पूरी तरह बंजर हो सकती है। उन्होंने कहा कि डंठल जलाने के बजाय खेत में इसकी जुताई करा दें। बरसात में डंठल सड़कर उर्वरक का काम करेगा। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ खेत की उर्वरा शक्ति बनी रहेगी। विदित हो कि गेंहू की कटनी के बाद किसान खेत की सफाई के उद्देश्य से डंठल में आग लगा देते हैं। वे समझते हैं कि अगले फसल की तैयारी के लिए यह जरूरी है पर इससे सिर्फ नुकसान ही नुकसान ह...
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