गोड्डा, फरवरी 7 -- बसंतराय । बसंतराय प्रखंड क्षेत्र में बिहार-झारखंड की सीमा पर बहने वाली गेरुआ नदी, जो कभी इस इलाके की जीवनरेखा मानी जाती थी, आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। नदी की धार लगातार सिमटती जा रही है, जिससे आसपास के गांवों में भूजल स्तर तेजी से नीचे गिरने लगा है। इसका सीधा असर खेती-किसानी, पशुपालन और आम लोगों के दैनिक जीवन पर पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले गेरुआ नदी में सालभर पर्याप्त पानी रहता था। इससे खेतों की सिंचाई आसानी से हो जाती थी और पानी की कोई समस्या नहीं होती थी। लेकिन अब स्थिति यह हो गई है कि गर्मी शुरू होने से पहले ही नदी सूखने लगती है। नतीजतन, सिंचाई कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और घरेलू उपयोग के लिए भी पानी की भारी किल्लत महसूस की जा रही है। किसानों के अनुसार, पहले गेरुआ नदी से निक...