कानपुर, फरवरी 1 -- रूरा, संवाददाता। गुरू व मित्र से छत करने पर मानव केा दरिद्रता का दंश मिलता है। भगवान श्री कृष्ण के अनन्य भक्त व निरूकामकर्मयोगी होने के बाद भी बाल्यावस्था में गुरूमाता के दिए चने अपने मित्र से छिपाकर खने में सुदामा को दरद्रिता का दंश मिला। काशीपुर गांव स्थित हुनमान गढ़ी अज्ञश्रम में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते हुए अचार्य ने यह बात कही।इस मौके पर वैदिक मंत्रों क साथ यज्ञ में पूर्णाहुति कराई गई। मैथा तहसील क्षेत्र के काशीपुर गांव स्थित हनुमानगढी में चल रहे श्री विष्णु महायज्ञ के अंतिम दिन बडी संख्या में पहुंची महिलाओं न यज्ञ मंडप की परिक्रमा करने के बाद परिसर मे ंचल रही श्रीमद् भागवत कथा का रसास्वादन किया। इस मौके पर आचार्य आलोक मिश्र ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि संतोष सबसे बड़ा धन है। लेकिन असंतज्ञेष काफल मनव के ल...