जौनपुर, नवम्बर 28 -- सतहरिया, हिन्दुस्तान संवाद। गुरु बिना ज्ञान संभव नहीं है। गुरु कोई साधारण व्यक्ति नहीं बल्कि ब्रह्म ज्ञानी, महात्मा और भगवान के प्रतिनिधि स्वरुपा होते हैं। इनकी प्राप्ति में जो प्रेम पूरित ह्रदय, पूर्ण समर्पण और भक्तिपूर्ण ह्रदय से अपने गुरु को देखते हैं वे हीं वास्तव में गुरु का दर्शन कर पाते हैं। वह मात्र भौतिक नेत्रों से संभव नहीं है। यह बातें बातें पंडित सिद्धार्थ त्रिपाठी ने मुंगराबादशाहपुर के पुरानी सब्जी मंडी में गुरुवार देर शाम को गुरु महिमा पर प्रवचन करते हुए श्रद्धालुओं के बीच में कहीं। उन्होंने कहा कि सूरदास के पास नेत्र नहीं थे। किंतु ह्रदय में श्रद्धा, भक्ति, समर्पण भावों से पूरित होने के कारण ही वे अपने ह्रदय व आत्मा में रोजाना भगवान कृष्ण का दर्शन करते थे। तो वहीं श्रद्धा, भक्ति, प्रेमदृष्टि व ज्ञान दृष...
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