हापुड़, फरवरी 12 -- गुरुकुल महाविद्यालय ततारपुर में आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती की 202वीं जयंती मनाई गई। मुख्य वक्ता वैदिक प्रवक्ता आचार्य योगेश भारद्वाज ने बताया कि महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती ने समाज में फैली कुरीतियों और पाखंड को भागने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उनका एक प्रसिद्ध नारा था। वेदों की और लौटो क्योंकि हमारा मूल वेद है। गुरुकुल के प्राचार्य डॉ प्रेमपाल शास्त्री ने महर्षि दयानंद के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। आचार्य कुशल देव ने भी महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन से आधारित प्रसंगों को विद्यार्थियों को सुनाया। आचार्य प्रदीप कुमार ने बताया कि महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती ने कहा था कि जन्म से कोई ब्राह्मण या शुद्र नहीं होता। उसके कर्म ही उसे वैसा बनाते हैं। संचालन डॉ.शि...