पूर्णिया, जून 15 -- पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। कामरेड अजीत सरकार सच्चे मायने में गरीबों के मसीहा थे। अपनी सादगी और बेबाकी के लिए मशहूर रहे अजीत दा ने अपने राजनीतिक जीवन मे कभी भी अपनी विचारधारा और सिद्धान्तों से समझौता नहीं किया। हालांकि इसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। उन्होंने नापाक गठजोड़ के सामने घुटने टेकने की बजाय अपनी जान देना पसंद किया। वे पूर्णिया में गुंडाराज और आतंकराज के विरोध के प्रतीक थे। वे गरीबों, शोषितों और वंचितों के लिए हमेशा नायक के रूप में याद किए जाएंगे। उक्त बातें सांसद संतोष कुशवाहा ने शनिवार को कॉमरेड अजीत सरकार के शहादत दिवस पर आर एन साह चौक पर स्थित स्व सरकार के शहीद स्मारक पर श्रद्धा-सुमन अर्पित करने के बाद कही। कुशवाहा ने कहा कि राजनीति में असहमति सामान्य बात है। लेकिन असहमति की परिणति हिंसा में...
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