ललितपुर, जनवरी 24 -- श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र गिरारगिरी जी में आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतिम दिन मुनिश्री समत्व सागर महाराज ने कहा कि सिद्धचक्र महामंडल आत्मशुद्धि का विधान है। जब आत्मा श्रद्धा, ज्ञान और चारित्र की परिक्रमा करती है, तभी जीवन में वास्तविक शांति का उदय होता है। उन्होंने कहा कि आज विश्व अशांति के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में अहिंसा, संयम और तप ही मानवता का पथ प्रशस्त कर सकते हैं। तीर्थ निर्माण केवल पत्थरों से नहीं, बल्कि पुण्य, भावना और त्याग से होता है। जो व्यक्ति तीर्थ के निर्माण में सहभागी बनता है, वह अपनी आत्मा के लिए भी तीर्थ का निर्माण करता है। कार्यक्रम के अंतिम दिन प्रात: बेला में अभिषेक, शांतिधारा, नित्यमह पूजन के पश्चात विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन हुआ। महोत्सव के पात्रों व श्रद्धालुओं ने सम्पूर्ण...