बांका, मई 7 -- कटोरिया (बांका) निज प्रतिनिधि। बांका जिले के स्थापना को तीन दशक से अधिक समय हो चुका है, लेकिन जिले के युवा और किसान आज भी उम्मीदों और संघर्षों के बीच फंसे हुए हैं। बांका की ज़मीन में पसीना बहाने वाले किसान और मेहनत करने वाले श्रमिक आज भी वही पुरानी जद्दोजहद कर रहे हैं। उनका सपना एक बेहतर कल का है, लेकिन वास्तविकता उन्हें रोज़ नई चुनौतियों से सामना कराती है। बांका की गलियों में घूमते हुए, उन युवाओं की आंखों में जो सपने हैं, वे कहीं खो से जाते हैं। यहां का हर दूसरा युवा अपनी किस्मत को आजमाने के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन करता है, वहीं किसान अपनी उम्मीदों को खेतों की ज़मीन में दबाकर अकेले संघर्ष कर रहे हैं। यह चुप तस्वीर बहुत कुछ कहती है, लेकिन किसी के पास इसे सुनने और समझने का वक्त नहीं है। आज भी यह जिला रोजगार की कमी के संकट...
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