पटना, मार्च 21 -- बिहार के कई ग्रामीण इलाकों के शहरों में शामिल होने के बाद मनरेगा मजदूरों के पास काम का संकट हो गया है। एक अनुमान के अनुसार राज्य भर में ऐसे मजदूरों की संख्या 4 लाख से अधिक है। अकेले मुजफ्फरपुर में ऐसे श्रमिकों की संख्या करीब 40 हजार है। राज्य में 350 से अधिक ग्राम पंचायतें शहरी क्षेत्र में शामिल हो गई हैं। यही कारण है कि नगर निकायों की संख्या 141 से बढ़कर 261 हो गयी है। मनरेगा के तहत काम ग्रामीण क्षेत्रों के श्रमिकों को ही मिल सकता है। नगर बनने के बाद इन मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है। बिहार में अभी 8053 ग्राम पंचायतें हैं। 4 साल पहले यह संख्या 8400 से अधिक थी। बिहार में मनरेगा योजना के तहत 90 लाख श्रमिकों के जॉब कार्ड बने हुए हैं। वर्तमान में करीब 10 लाख श्रमिकों को इस योजना से काम दिया जा रहा है। मनरेगा में काम मांग...
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