नई दिल्ली, मई 9 -- महाराष्ट्र की मिट्टी और हाथों की कलाकारी से गुंथी कोल्हापुरी चप्पलें, न सिर्फ एक राज्य की पहचान भर है, बल्कि इन्हें देश-विदेश में भी पसंद किया जाता है। कोल्हापुरी चप्पलों की शुरुआत 12वीं सदी के आसपास मानी जाती है, जब मराठा योद्धाओं और किसानों के लिए टिकाऊ, मजबूत और गर्मी से राहत देने वाली चप्पलों की जरूरत थी। उस वक्त लेदर क्राफ्ट में पारंगत कोल्हापुर के दस्तकारों ने इसे संवारना शुरू किया। इसकी खास बात यह है कि यह चप्पल शुद्ध चमड़े से बनाई जाती थी और इसमें कोई कील या धातु का इस्तेमाल नहीं होता था। समय के साथ-साथ इस चप्पल ने भारत के कोने-कोने में पहचान बनाई। वेजिटेबल टैनिंग तकनीक से तैयार यह चप्पल न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि पहनने में भी बेहद आरामदायक होती है। भारतीय परंपरा के साथ इसमें नएपन का तड़का हमेशा ही महसूस...
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