गया, सितम्बर 11 -- गया जी को पितृपक्ष मेला और पिंडदान की परंपरा के लिए विश्वभर में जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में गया क्षेत्र पंचकोसी क्षेत्र में फैला था, जो प्रेतशिला से लेकर बोधगया तक विस्तृत था। वृहद गया महात्मय और वायुपुराण में 360 वेदियों का उल्लेख मिलता है, लेकिन समय के साथ उपेक्षा और देखरेख के अभाव में अब यह संख्या घटकर मात्र 54 रह गई हैं। इनमें उत्तर में 5, मध्य भाग में 45 और दक्षिण दिशा में 4 पिंडवेदियां शेष हैं। इन शेष पिंडवेदियों में प्रमुख हैं प्रेतशिला, ब्रह्मकुंड, रामशिला, रामकुंड, काकबली, उत्तर मानस, गया दित्य, उदीची वेदी, कनरवल, दक्षिण मानस, सूर्यकुंड, गदाधर वेदी, गया सिर, गया कूप, मुंडपृष्ठ, आदि गया, गोदावरी सरोवर, मंगलागौरी, वैतरणी सरोवर, भीम गया, अक्षयवट और अविमुक्तेश्वरनाथ मंदिर। यही वे स्थान...
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