अमरोहा, जुलाई 4 -- बस्ती में सात मोहर्रम का मातमी जुलूस अंजुमन यादगार-ए-हुसैनी के संयोजन में दोहरी गश्त के साथ बरामद हुआ। इमाम हुसैन की शहादत याद करते हुए अजादारों ने जंजीर से मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया। गुरुवार दोपहर एक बजे जुलूस की शुरुआत बस्ती स्थित मजहर-ए-कर्बला से हुई। मोहर्रम अली व हमनवां ने मर्सिया पेश किया वहीं नौहे ख्वानी की शुरुआत मरगूब हैदर व शमीम हैदर ने की। करीब 200 साल पुराना मर्सिया बानो ने रो-रो के ये शह से कहा, असगर-ए-मासूम को गश आ गया, सुनकर अजादार गमगीन हो गए। तयशुदा रास्ते पर आगे बढ़े जुलूस में जुल्जनाह भी शामिल था। अलम मुबारक की तादाद भी अन्य जुलूसों के मुकाबले ज्यादा थी। जरी मुबारक के साथ ही ऊंट भी थे। जुलूस के मजहर-ए-कर्बला पहुंचने पर अयाज अब्बास ने रजा नौगांवी का मशहूर मर्सिया पढ़कर इमाम हुसैन को पुरसा पेश किय...
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