सिमडेगा, नवम्बर 25 -- सिमडेगा, प्रतिनिधि। वैसे तो जिले को वर्ष 2019 में ही खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया है। इसके बाद भी आज भी ग्रामीण इलाकों में लगभग जिले के आधी से भी अधिक आबादी खुले में ही शौच करने को विवश हैं। सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर शौचालय निर्माण के बाद उम्मीद थी कि जिले में स्वच्छता की स्थिति बेहतर होगी। लेकिन हकीकत यह है कि शौचालय बन जाने के बावजूद उनका उपयोग अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। लोगों का कहना है कि लोग खूले में शौच करने की अपनी मानसिकता बदलें। उपयोग करने लायक शौचालय का उपयोग करें। शौचालय का उपयोग करने के लिए जागरुकता की कमी भी प्रमुख कारण है। जिले में इसको लेकर जागरुकता अभियान चलाने की जरुरत हैं। वहीं जर्जर हो चुके शौचालयों को मरम्मत एवं शौचालय में पानी की व्यवस्था करा कर खूले में शौच से मुक्त सिमडेग...
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