नई दिल्ली, फरवरी 21 -- कहते हैं सीखने की कोई उम्र नहीं होती। और सीखना तब ज्यादा जरूरी हो जाता है, जब बात अस्तित्व की हो। एक महिला का जीवन चारदीवारी के बाहर भी होता है। पर, घर के बाहर की ओर नजर डालें तो स्थितियां अभी भी चुनौतीपूर्ण ही हैं क्योंकि हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में बेहद कम नजर आती है। इसका एक बड़ा कारण है घर की जिम्मेदारी। घर संभालने और बच्चों की देखरेख के लिए अधिकांश कामकाजी महिलाओं को अपने काम से ब्रेक लेना ही पड़ता है। कई लोगों के लिए यह छुट्टी आजीवन हो जाती है। जो वापस आना चाहती हैं, उनके लिए राहें आसान नहीं होती क्योंकि चार-पांच साल का करियर गैप और उस बीच उद्योग में आए बदलाव उनकी वापसी की राह कठिन कर देते हैं। एक अध्ययन बताता है कि भारत में कामकाजी महिलाओं का आंकड़ा केवल 25 प्रतिशत है, जिसमें भी अकसर ...
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