नई दिल्ली, दिसम्बर 10 -- अपने आपको जानने की कोई पद्धति नहीं है। किसी पद्धति को खोजने का एक ही अर्थ होगा कि हम किसी परिणाम को हासिल करना चाहते हैं; और वही तो हम सभी को चाहिए। हम किसी सत्ता-प्रामाण्य का अनुसरण करते हैं। यदि यह किसी व्यक्ति का नहीं है, तो किसी पद्धति या विचारधारा का हो सकता है, क्योंकि हम कोई ऐसा परिणाम चाहते हैं, जो संतोषजनक हो और हमें सुरक्षा दे सके। हम वास्तव में अपने को, अपने आवेगों और अपनी प्रतिक्रिया को, अपने सोचने की समस्त प्रक्रियाओं को, चाहे वे चेतन हों अथवा अचेतन, समझना नहीं चाहते, बल्कि हम उस प्रणाली का अनुसरण करना पसंद करते हैं, जो हमें किसी परिणाम का आश्वासन दे सके। किसी विधि का अनुसरण निश्चित तौर पर सुरक्षा पाने की हमारी अभिलाषा का परिणाम है और स्पष्ट है कि कोई भी परिणाम स्वयं की समझ नहीं है। जब हम किसी पद्धति ...