नई दिल्ली, नवम्बर 8 -- जिंदगी की खूबसूरती उसकी अनिश्चितता में ही है। हम बनना कुछ और चाहते हैं, बन कुछ और जाते हैं। इसीलिए सयाने लोग कहते हैं, जीवन के हरेक क्षण को भरपूर जीने वाले लोग ही अपने देश-समाज और इंसानियत को कुछ ऐसा देकर जाते हैं, जिसके लिए आने वाली नस्लें उनको याद करती हैं। मित्तल पटेल ऐसे ही खास लोगों में से एक हैं। करीब 44 साल पहले मेहसाणा (गुजरात) के शंखलपुर गांव में मित्तल पैदा हुईं। माता-पिता, दोनों खेती-किसानी से जुड़े थे। उन्होंने बेटी को बड़े लाड से पाला। मित्तल एक ऐसे माहौल में बड़ी हुईं, जहां लड़की होने के कारण उन पर किसी तरह की पाबंदी नहीं थी। इसीलिए उनके गांव में जब कोई बहुरूपिया किसी देवता का रूप धरकर आता या सांप के खेल व रस्सियों पर अपनी कलाबाजी दिखाता या फिर चाकू-छुरी पर सान चढ़ाने की आवाजें लगाता, मित्तल इन हुनरमंद...
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