नई दिल्ली, जनवरी 30 -- जब मन में क्रोध की एक बड़ी तरंग आती है, तब उसे कैसे वश में लाया जाए? बहुत सरल सा जवाब है- उसके विपरीत एक तरंग उठाकर। उस समय प्रेम की बात मन में लाओ। कभी-कभी ऐसा होता है कि पत्नी अपने पति पर खूब गरम हो जाती है, लेकिन उसी समय उसका बच्चा वहां आ जाता है और वह उसे अपनी गोद में उठाकर चूम लेती है; इससे उसके मन में बच्चे के प्रति प्रेम-तरंग उठने लगती है और वह पहले तरंग को दबा देती है। प्रेम क्रोध के विपरीत है। इसी प्रकार, जब मन में किसी किस्म की चोरी का भाव उठे, तो उसके विपरीत भाव का चिंतन करना चाहिए। जब दान ग्रहण करने की इच्छा पैदा हो, तो उसके विपरीत भाव का चिंतन करना चाहिए। मैं स्वयं यदि कोई झूठ कहूं, तो उससे जो पाप होता है, उतना ही पाप तब भी होता है, जब दूसरे को झूठ कहने में लगाता हूं अथवा दूसरे की किसी झूठी बात का अनुमो...