नई दिल्ली, फरवरी 12 -- भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के अंतर्गत तलाक-ए-हसन के एक मामले में अभूतपूर्व कदम उठाते हुए पति द्वारा तलाक की दो कोशिशों पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेज दिया है, ताकि वैवाहिक विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जा सके। यह निर्देश तब आया जब पता चला कि पति ने 2022 में पहली बार तलाक-ए-हसन देने के बाद दूसरी शादी भी कर ली है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष महिला बेनजीर हीना की ओर से वरिष्ठ वकील रिजवान अहमद और पति यूसुफ नाकी की ओर से पेश हुए एमआर शमशाद ने शरीयत और मुस्लिम पर्सनल लॉ की विपरीत व्याख्याएं प्रस्तुत कीं। इसके बावजूद, पीठ ने दोनों पक्षों को बातचीत के माध्यम से हल निकालने के लिए मनाने में सफलता पाई। मामले की शुरुआत 2022 मे...
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