पूर्णिया, जनवरी 26 -- पूर्णिया पूर्व, एक संवाददाता। कोयल की मधुर कूक 'कू-कू' जब वातावरण में गूंजती है तो लोगों को बरबस ही यह एहसास हो जाता है कि बसंत ऋतु का आगमन हो चुका है। कोयल की यह मधुर आवाज़ न केवल बसंत ऋतु की याद दिलाती है, बल्कि आम की मंजरी की खुशबू का भी अहसास करा देती है। सरस्वती पूजा के साथ ही बसंत ऋतु के प्रवेश करते ही आम के पेड़ों की टहनियों पर मंजर दिखाई देने लगते हैं। आम की खेती करने वाले किसान इस समय पेड़ों में आए मंजरों की देखभाल में जुट जाते हैं। मंजरों को कीट-पतंगों से बचाने और बेहतर फलन के लिए किसान आम के पेड़ों में कीटनाशक एवं पोषक तत्वों (विटामिन) का छिड़काव शुरू कर चुके हैं। हालांकि इन तैयारियों के बीच किसानों को एक चिंता अभी से सताने लगी है कि कहीं पिछले साल की तरह इस साल भी आम की उचित कीमत न मिले। गौरतलब है कि बीते...