नई दिल्ली, नवम्बर 23 -- ब्राजील के बेलेम में जब शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन (कॉप-30) का परदा गिरा, तो यही उम्मीद जताई गई कि बेहतर भविष्य के लिए सभी देश मिलकर काम करेंगे, मगर इस सम्मेलन का हासिल बता रहा है कि यह इतना आसान भी नहीं है। विशेषकर सम्मेलन के आखिरी दिन जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने को लेकर जिस तरह की खींचतान होती रही, वह दुनिया को बहुत आश्वस्त करने वाली नहीं थी। हालात यहां तक बिगड़े कि इससे जुड़ी जिस वैश्विक योजना का जिक्र पहले ड्राफ्ट में किया गया था, उसे संशोधित ड्राफ्ट से हटा लिया गया। साफ है, जीवाश्म ईंधन का पेच आगे भी फंसा रहने वाला है। इस सम्मेलन की शुरुआत 11 नवंबर को हुई थी और माना जा रहा था कि तमाम देश 'ग्लोबल वार्मिंग' के विरुद्ध किसी ठोस नतीजे पर पहुंच जाएंगे। मगर यह सम्मेलन जिस गति से अ...
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