नई दिल्ली, अक्टूबर 8 -- एक वक्त था जब फिल्मों के पोस्टर हाथ से बनाए जाते थे। उन्हें ड्रॉ किया जाता था और उसके बाद असली रंगों से उन्हें सजाया जाता था। लेकिन यह काम ना सिर्फ काफी वक्त लेता था, बल्कि साथ ही पोस्टर्स में कई बार वो फिनिशिंग भी नहीं आ पाती थी। लेकिन फिर वक्त बीता और तकनीक ने कलाकारों की जगह ले ली। पोस्टर्स को ड्रॉ करने और पेंट करने की जगह कंप्यूटर पर डिजाइन और एडिट किया जाने लगा और हाई क्वालिटी प्रिटिंग हर पोस्टर को जैसे जीवंत कर दिया करती थी।'पोस्टर शूट करना चाहें भी तो नहीं हो सकता' लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज के वक्त में जब इतनी हाई क्लास टेक्नोलॉजी उपलब्ध है। तब भी पोस्टर बनाना इतना आसान नहीं है। आज के जमाने में पोस्टर बनाने की अपनी चुनौतियां हैं। ग्राफिक्स मिस्त्री स्टूडियोज के फाउंडर और क्रिएटिव हेड भव्य तनेजा ने एक पॉड...
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