नई दिल्ली, जनवरी 20 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की प्रधान पीठ ने आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ शुरू की गई विभागीय कार्रवाई को कानूनी रूप से गलत करार दिया है। न्यायाधिकरण ने कहा कि जिन तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आरोप पत्र जारी किया गया, उनके इस्तेमाल पर पहले ही अदालतों ने रोक लगा रखी थी। कैट ने सोमवार को दिए आदेश में 18 अगस्त 2025 के आरोप पत्र को चुनौती देने वाली वानखेड़े की याचिका पर फैसला सुनाया। न्यायाधिकरण के मुताबिक, यह आरोपपत्र विशेष जांच दल की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पर आधारित था, जबकि कानून साफ तौर पर कहता है कि प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर विभागीय कार्रवाई नहीं की जा सकती। समीर वानखेड़े के खिलाफ विभागीय कार्रवाई इसलिए शुरू की गई थी क्योंकि आरोप है कि उन्होंने अपने पद ...