बिहारशरीफ, फरवरी 22 -- कूड़ा-कचरा में भविष्य तलाश रहे हैं छोटे-छोटे बच्चे होटल, ईंट भट्ठा व गैराजों में कराया जा रहा काम चेवाड़ा , निज संवाददाता । समाज के सभी वर्गों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के दावे खूब किये जा रहे हैं। इसके लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं चलायी जा रही हैं। टोला सेवकों की तैनाती की गयी है। लेकिन, हकीकत ठीक उल्टा है। आज भी कई नौनिहाल पढ़ने की जगह बाल श्रम कर रहे हैं। नगर पंचायत सहित आसपास के इलाकों में हर दिन दर्जनों बच्चे कूड़ा-कचरा में अपना भविष्य तलाशते हर दिन दिख जाते हैं। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में कॉपी-पेंसिल व किताब होनी चाहिए, उस उम्र में अपने पेट की आग बुझाने के लिए ईंट भट्ठा, होटलों व अन्य जगहों पर काम करने को मजबूर हैं। बच्चों की लाचारी का फायद शहर के दुकानदार खूब उठा रहे हैं। बिना डर-भय के इन बच्चो...
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