इटावा औरैया, मार्च 3 -- इटावा, संवाददाता। डकैतों के गिरोह में शामिल होने के बाद कुसुमा ने चोरी-छिपे बंदूक चलाना सीखा। धीरे-धीरे वह गैंग की लीडर बन बैठी। बीहड़ांचल के लोग बताते हैं कि जालौन जिले के गांव टीकरी में में जन्मी कुसुमा नाइन किशोरावस्था में ही लड़ाई-झगड़ों में आगे रहती थी। आस्ता कांड की गूंज देशभर में फैली डकैत फूलन देवी और विक्रम मल्लाह ने लालाराम और श्रीराम को ठिकाने लगाने के लिए मुखबिर बनाकर कुसुमा को उनके गैंग में शामिल करा दिया। वहां रहने पर तब के दस्यु श्रीराम ने इसे अपना विश्वासपात्र बना लिया। 1984 में आस्ता कांड की जिम्मेदारी श्रीराम ने कुसुमा को सौंपी। बच्चों और महिलाओं समेत 15 लोगों को मौत के घाट उतारने के साथ ही उसने गांव में आग लगा दी थी। इस घटना के बाद देशभर में हड़कंप मच गया था। कुसुमा का नाम बढ़ा तो रामआसरे फक्कड़ गैं...
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