बिजनौर, जनवरी 29 -- बिजनौर। कुष्ठ रोग न तो अभिशाप है और न ही असाध्य। सही जानकारी, समय पर उपचार और मानवीय दृष्टिकोण से ही इस रोग को समाज से समाप्त किया जा सकता है। ऐसे ही प्रयासों से बीते वर्ष उपचार मुक्त कर 222 कुष्ठ रोगी मुख्य धारा में लाए गए हैं। 195 नए कुष्ठ रोगी भी खोजकर इनका उपचार शुरू किया गया है। भारत सहित विश्व में कुष्ठ रोग की प्रचलन दर में कमी आई है, फिर भी हर वर्ष नए मामले सामने आना यह दर्शाता है कि जागरूकता और निगरानी की निरंतर आवश्यकता है। जिला कुष्ठ अधिकारी डा. देवेन्द्र कुमार के अनुसार राष्ट्रीय कुष्ठ नियंत्रण कार्यक्रम के तहत दिसंबर 2025 तक पिछले वर्ष कुल 195 रोगी पंजीकृत किए गए, जिनमें 107 पीबी तथा 88 एमबी श्रेणी के रोगी हैं। एमबी रोगियों का उपचार 12 माह तथा पीबी रोगियों का उपचार छह माह होता है। आरएफटी यानी उपचारमुक्त कर ...
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