हल्द्वानी, जनवरी 15 -- नैनीताल। उत्तराखंड की लोकसंस्कृति में मकर संक्रांति, जिसे कुमाऊं में घुघुती पर्व कहा जाता है, का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति के अगले दिन कौवों को भोज पर बुलाने की परंपरा आज भी कुमाऊं अंचल में पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। गुरुवार सुबह छोटे-छोटे बच्चे गले में घुघुती की माला पहनकर कौवों को आमंत्रित करते नजर आए। बच्चों ने काले कौआ काले, घुघुती माला खा ले गीत गाकर कौवों को बुलाया और उन्हें पूड़ी व प्रसाद अर्पित किया। लोकमान्यताओं के अनुसार इस पर्व के पीछे चंद वंश के राजकुमार निर्भयचंद से जुड़ी भावुक कथा है। कहा जाता है कि कौवों ने राजकुमार की जान बचाई थी। उसी स्मृति में मकर संक्रांति के अगले दिन कौवों को घुघुती खिलाने की परंपरा चली आ रही है, जो आज भी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बनी हुई है।
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