मऊ, अगस्त 15 -- मऊ। कभी इंसान के सबसे वफादार साथी माने जाने वाले कुत्ते, आज गली-मोहल्लों में दहशत का पर्याय बनते जा रहे हैं। शहर समेत ग्रामीण अंचलों की गलियों में अब ये आवारा कुत्ते सिर्फ भौंकते ही नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा और मानसिक शांति दोनों पर हमला कर रहे हैं। चाहे बच्चों का अकेले बाहर निकलना हो या राह चलते बुजुर्ग-महिलाएं, हर कदम पर डर साया मंडराता रहता है। गुरुवार को 'हिन्दुस्तान' टीम ने शहर के आमजन से बात की तो सामने आया कि कुत्तों की अनियंत्रित बढ़ती आबादी सड़क हादसों और असुरक्षा की भावना का प्रमुख कारण बन चुकी है। लोगों की मांग है कि दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर जनपद में भी इन बेजुबानों के लिए स्थायी शेल्टर होम बनाए जाएं, जिससे इंसान और जानवर दोनों की जिंदगी में संतुलन और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। जब इंसानों की गलियों पर दहशत का ...
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