नई दिल्ली, फरवरी 17 -- सनक, सनंदन, सनातन तथा सनतकुमार भगवान विष्णु से मिलने वैकुंठ लोक गए। वहां उनके द्वारपाल जय-विजय ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया और उनका अपमान किया। इससे क्रुद्ध होकर चारों मुनि कुमारों ने जय-विजय को पृथ्वी लोक पर असुर के रूप में जन्म लेने का शाप दे दिया। ऋषि कुमारों द्वारा शाप मिलने पर दोनों द्वारपालों को अपनी गलती का अहसास हुआ। वे दोनों उनके चरणों पर गिरकर पश्चाताप करने लगे और अपने अपराध के लिए क्षमा मांगने लगे। उसी समय वहां देवी लक्ष्मी सहित विष्णु पधारे। चारों मुनि कुमारों ने उन्हें प्रणाम किया। जय-विजय ने भगवान विष्णु को सास वृत्तांत सुनाया और प्रार्थना करते हुए कहा,'प्रभु हम पर दया करें। हमें शाप मुक्त करें।'भगवान विष्णु ने कहा, 'यह मेरे वश में नहीं है। ये चारों मुनि कुमार ही तुम्हें इस शाप से मुक्त कर सकते हैं।...