नई दिल्ली, अगस्त 20 -- अगर आप दिल्ली में रहते हैं, तो कभी ना कभी हरि नगर घंटाघर के बारे में जरूर सुना होगा। ये घंटाघर पहली नजर में एक साधारण सा टावर लगता है, लेकिन ये अपने पीछे छुपाए है एक ऐसी कहानी, जो समय के पन्नों में खो सी गई है। 1950 में बना यह घंटाघर न सिर्फ घड़ी की सुइयों को घुमाता है, बल्कि एक परिवार की विरासत, एक नवाब के दौर और दिल्ली के बदलते रंगों को भी बयां करता है। आइए इस हरि नगर घंटाघर की कहानी आपको बताते हैं।किसने बनवाया हरि नगर घंटाघर? हरि नगर घंटाघर का जिक्र आरवी स्मिथ ने अपनी किताब 'दिल्ली- अननॉन टेल्स ऑफ ए सिटी' में किया है। इस घंटाघर को हरि राम के बेटे स्वरूप लाल दिवान ने बनवाया था। लेकिन उनकी विरासत आज भी जिंदा है। स्वरूप के बेटे श्याम गोपाल अपने पुश्तैनी बंगले में आज भी रहते हैं, जो बेरीवाला बाग में 1906 में बना था। ...
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