नई दिल्ली, अगस्त 5 -- राजधानी दिल्ली शहर इतिहास की परतों में लिपटा हुआ है। इसकी गलियों, सड़कों और इमारतों में सैकड़ों साल पुरानी कहानियां बसती हैं। इनमें से एक है खूनी दरवाजा, जो अपने नाम की तरह एक डरावने और खूनी इतिहास को समेटे हुए है। बहादुरशाह जफर मार्ग पर दिल्ली गेट के पास खड़ा यह स्मारक न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि इसके साथ जुड़ी कहानियां इसे रहस्य और रोमांच से भर देती हैं। आज हम इसी खूनी दरवाजे की कहानी बताने जा रहे हैं।शेरशाह सूरी का काबुली दरवाजा खूनी दरवाजा, जिसे पहले काबुली दरवाजा या लाल दरवाजा के नाम से जाना जाता था, सूर साम्राज्य के संस्थापक शेरशाह सूरी के शासनकाल (1540-1545) में बनवाया गया था। यह दरवाजा फिरोजाबाद (आज का फिरोज शाह कोटला) के लिए बनाया गया था और इसका नाम इसलिए पड़ा क्योंकि अफगानिस्तान से आने वाले कारवां ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.