नई दिल्ली, नवम्बर 22 -- पुरानी दिल्ली की तंग गलियों में कई कहानियां छिपी हुई हैं। इन्हीं में से एक गली है 'लोहे वाली गली'। नाम सुनकर लगता है कि यहां लोहे का कारोबार होता होगा, लेकिन यहां की कहानी बेहद अलग और रोचक है। आज हम इसी पुरानी लोहा गली के बारे में बता रहे हैं।शादी के कार्डों का अड्डा बन चुकी है गली चावड़ी बाज़ार के पास वाली ये गली लोहे वाली कोई लोहारखाना नहीं, बल्कि शादी के कार्डों का अड्डा बन चुकी है। दोपहर की कमजोर नवंबरी धुंधली धूप भी यहां की दीवारों पर चढ़ी धूल और उखड़ती पपड़ी देखकर रास्ता भटक जाती है। कहीं मुरझाया गेंदे का हार लटक रहा है, कहीं किसी शटर रिपेयर करने वाले का फटा पुराना पोस्टर। एक कटी पतंग बिजली के खंभे में अटकी तड़प रही है। सामने एक पुराना दरवाजा ताला लगाए चुपचाप खड़ा है। अंदर से झांको तो बिना छत के आंगन से खुला ...
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