नई दिल्ली, फरवरी 6 -- सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी महिला, खासकर नाबालिग को 'मां' बनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अदालत ने 17 साल की लड़की को 30 सप्ताह के गर्भ को डॉक्टर की देखरेख में गर्भपात कराने की अनुमति देते हुए यह टिप्पणी की। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि गर्भवती लड़की की प्रजनन स्वायत्तता को पूरा महत्व दिया जाना चाहिए, खासकर ऐसे हालात में जहां लड़की साफ तौर पर गर्भावस्था को जारी नहीं रखना चाहती हो। पीठ ने अपने फैसले में कहा कि जिस बात पर विचार करने की जरूरत है, वह नाबालिग बच्ची का गर्भावस्था जारी रखने का अधिकार है, जो देखने में 'अवैध' था क्योंकि वह खुद नाबालिग थी और एक रिश्ते से पैदा हुई दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति के कारण गर्भावस्था का सामना कर ...
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