चंदौली, फरवरी 14 -- धानापुर, हिन्दुस्तान संवाद। किसानों के उत्थान एवं विकास के लिए वर्षों पहले शासन स्तर से प्रत्येक 100 वर्ग किलोमीटर पर एक एग्रीकल्चरल मार्केटिंग हब का निर्माण कराया गया। उस वक्त गांव-गिरांव के किसानों को यह भरोसा दिलाया गया कि इसके बनने से वे न केवल अपने कृषि उपज को आसानी से बेच सकेंगे, बल्कि गांव गिरांव में भी सब्जियों की छोटी-छोटी मंडियां लगने लगेंगी। सरकार की इस पहल से किसान भी उत्साहित थे कि उनमें व्यावसायिक खेती के प्रति झुकाव तो बढ़ेगा ही,वे अपने उपज को भी यहीं पर बेचकर अच्छा मुनाफा भी कमा सकेंगे, लेकिन सरकार की इस मंशा पर मुलाजिमों ने ही पानी फेर दिया। लाखों रुपये से तैयार ढांचा भी तबाह हो चुका है। आलम यह है कि एग्रीकल्चरल मार्केटिंग हब के बनने से किसानों को कोई लाभ नहीं मिल पाया। एग्रीकल्चरल मार्केटिंग हब के निर...
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