नई दिल्ली, अप्रैल 14 -- Bhimrao Ambedkar Jayanti: आज 14 अप्रैल है, भारत के संविधान निर्माता, समाज सुधारक और भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती। उनके जीवन के कई पहलू प्रेरणा से भरे हुए हैं, लेकिन एक किस्सा ऐसा है, जो न केवल उनकी पीड़ा को उजागर करता है, बल्कि उनके असाधारण आत्मबल और ज्ञान की लालसा को भी दिखाता है। बचपन में जब डॉ. आंबेडकर स्कूल जाते थे, तो उन्हें कक्षा में बैठने के लिए चटाई तक नहीं दी जाती थी। बरसात के दिनों में कीचड़ और पानी में बैठकर पढ़ना उनकी नियति बन चुका था। जातिगत भेदभाव इतना गहरा था कि स्कूल में उच्च जाति के छात्र या शिक्षक उन्हें किताबें हाथ से नहीं देते थे। किताब देने के लिए लकड़ी की छड़ी का इस्तेमाल होता था-ताकि उनका 'स्पर्श' न हो। यह वाकया डॉ. आंबेडकर ने अपनी आत्मकथा "Waiting for a Visa" में लिखा है, यह दर्शाता...
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