नई दिल्ली, जनवरी 15 -- आज के डिजिटल युग में माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर बनी हुई है। ज्यादातर पेरेंट्स की यह शिकायत बनी हुई रहती है कि उनके बच्चे का मन पढ़ाई में बिल्कुल नहीं लगता है। थोड़ी देर पढ़ने के बाद उसका ध्यान इधर-उधर भटकने लगता है। माता-पिता बच्चे की एकाग्रता की कमी को उसकी 'लापरवाही' समझकर उसे डांटने लगते हैं, लेकिन हकीकत में उसका ध्यान भटकाने वाले कारक उसके भीतर नहीं बल्कि आस-पास के वातावरण में ही छिपे होते हैं। एक बच्चा जब किताब खोलकर बैठता है, तो उसके दिमाग में चल रहे गैजेट्स के शोर और सोशल मीडिया की चमक के बीच पढ़ाई की शांति कहीं खो जाती है। यह समझना बेहद जरूरी है कि एकाग्रता रातों-रात पैदा नहीं होती, बल्कि यह उन बाधाओं को हटाने से आती है जो बच्चे की मानसिक ऊर्जा को सोख रही हैं। पढ़ाई से भटकाव के...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.