नई दिल्ली, फरवरी 24 -- काशी के काशी विश्वनाथ मंदिर में रंगभरी एकादशी का विशेष महत्व है। इस दिन बाबा विश्वनाथ माता गौरा का गौना कराते हैं और होली के रंगों की शुरुआत होती है। 2026 में रंगभरी एकादशी 27 फरवरी को पड़ रही है। टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत आवास 'गौरा-सदनिका' में पूर्व महंत परिवार के प्रतिनिधि पं. वाचस्पति तिवारी ने बताया कि 24 फरवरी से माता गौरा के गौने की रस्में शुरू होंगी। यह परंपरा काशी की होली को अनोखा बनाती है।गौने की रस्में 24 फरवरी से शुरू रंगभरी एकादशी से पहले माता गौरा का गौना निकलता है। 24 फरवरी से गौने की रस्में शुरू होंगी। यह रस्में पारंपरिक रूप से पूर्व महंत परिवार और मंदिर के सेवायतों द्वारा पूरी की जाती हैं। गौने में माता गौरा को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और बाबा विश्वनाथ के साथ उनका विवाह प्रतीकात्मक रूप से संपन्न ...