टिहरी, नवम्बर 11 -- वर्तमान संचार क्रान्ति के दौर में सोशल मीडिया सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए आसान प्लेटफार्म है, परन्तु कहीं न कहीं यह इंफार्मेशन डिसआर्डर भी पैदा कर रहा है। जहां सूचनाओं का सत्यापन बहुत कम होता है। ऐसे में आवश्यक है कि हम सभी अपने अंदर आलोचनात्मक सोच विकसित करें। यह वक्तव्य मुख्य अन्वेषक शोध परियोजना डा सृचना सचदेवा ने धर्मानन्द उनियाल राजकीय महाविद्यालय नरेन्द्रनगर में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के अन्तर्गत संचालित सोशल मीडिया द्वारा प्रसारित झूठे एवं भ्रामक समाचारों का उत्तराखण्ड की ग्रामीण जनता पर प्रभाव शोध परियोजना के तहत आयोजित सोशल एवं डिजिटल मीडिया साक्षरता कार्यशाला में कही। कार्यशाला का शुभारम्भ अतिथियों में पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक उत्तराखंड प्रो एनपी माहेश्वरी, सीएमएस डा सुनीता त्यागी, डा ...
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