लखीसराय, जनवरी 9 -- लखीसराय, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। प्रसिद्ध शिव मंदिर अशोक धाम परिसर में शनिवार से आयोजित नौ दिवसीय शृंगी ऋषि मानस आधारित रामकथा के छठे दिन गुरुवार को मोरारी बापू ने श्रद्धालुओं को त्याग और वैराग्य में फर्क के साथ तीव्र भक्ति योग, तीक्ष्ण ज्ञान योग एवं कर्मकार कर्म योग के बारे में बताया। हमें कार्य को पूरी ईमानदारी, निष्ठा व समर्पण युक्त होकर करना चाहिए। कोई भी कार्य करते समय हमें यह अनुभूति होनी चाहिए कि जो कर्म हम कर रहे हैं वो ठीक से पूरा करेंगे। प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्म से तृप्ति होनी चाहिए। काम शब्द कर्म योग का संकेत करता है। इसलिए हमें किसी भी काम को करते समय उसके प्रति समर्पित रहना चाहिए। अतृप्ति जीवित अग्नि संस्कार है। किसी भी काम का अंत कैसा हो इसकी परवाह किए बिना इस काम में हमने कोई कमी नहीं छोड़ा इस बात की...