अलीगढ़, दिसम्बर 24 -- (सवालों में अस्पताल) अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददादाता। निजी अस्पतालों के खिलाफ शिकायतें मानो कागजों के 'आईसीयू' में भर्ती हैं, जहां इलाज नहीं सिर्फ इंतजार मिलता है। गलत इलाज, अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोपों के बावजूद जांच के नाम पर तारीखें बढ़ती रहीं। सीएमओ कार्यालय की फाइलें तब तक नहीं हिलतीं, जब तक मामला हंगामा न बन जाए या जनप्रतिनिधि व उच्चाधिकारियों का आदेश न आ जाए। शिकायतकर्ता दफ्तरों के चक्कर काटते रहे, जबकि जिम्मेदारी फाइलों के भरोसे छोड़ दी गई। निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर उठी शिकायतें लंबे समय तक दबाई जाती रहीं हैं। आरोपों में गलत इलाज, मानकों की अनदेखी, अपात्र स्टाफ से उपचार और दस्तावेजी अनियमितताएं शामिल रहीं, लेकिन जांच की रफ्तार कागजों से आगे नहीं बढ़ी। शिकायतकर्ताओं को बार-बार 'जांच चल रही है' ...
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