हापुड़, फरवरी 21 -- होलिका दहन से पहले के आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। इसकी शुरुआत फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होती है। इस वर्ष होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेगा। पंडित विनोद शास्त्री के अनुसार इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। इस दौरान शुभ कार्यों पर रहता है प्रतिबंध। विनोद शास्त्री ने बताया कि होलाष्टक के दौरान शादी, विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इस समय को आध्यात्मिक साधना और संयम के लिए उचित माना गया है। पंडित विनोद शास्त्री के अनुसार इस वर्ष तीन मार्च की सुबह 4:56 बजे होलिका दहन होगा। इस दिन 3 तारीख की सुबह चंद्र ग्रहण के सूतक के चलते होलिका रंग उत्सव नहीं मनाया जा सकेगा।इसके बाद 4 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी। :::होलाष्टक में ग्रहों का विशेष प्रभाव पंडित विनोद शास्त्र...