गढ़वा, जुलाई 18 -- गढ़वा, प्रतिनिधि। कला क्षेत्र से जुड़े स्थानीय लोग बताते हैं कि हमारी कला संस्कृति को जीवित रखने में अतुल्य योगदान देने वाले लोककला साधक और जनजातीय कला साधक हमारे सांस्कृतिक राजदूत हैं। उन्हें उचित सम्मान, धन और अवसर शासन-प्रशासन के द्वारा निश्चित ही उपलब्ध कराया जाना चाहिए। जनजातीय क्षेत्रों में लोककला साधक अभावग्रस्त जीवन जीने को विवश हैं। किसी तरह से जीवन यापन करते हुए भी अपनी संस्कृति को बचाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी वर्तमान दशा को देखकर उनकी अगली पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाने में अरुचि दिखा रही है। यह भारतीय सांस्कृतिक विरासत के भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। हम सभी को मिलकर अपनी लोक संस्कृति को बचाने की दिशा में योगदान देना ही होगा। कला साधकों ने कहा कि पूर्ववर्ती झारखंड सरकार के पर्यटन, कला, संस्क...
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